10:31 PM
0
रामलाल (डॉक्टर से)- डॉक्टर साहब! मैं चश्मा लगाकर पढ़ सकूंगा न?

डॉक्टर (रामलाल से)- हां.. हां.. बील्कुल।

रामलाल- तो फीर ठीक है वरना अनपढ़ आदमी की जीन्दगी भी कोई जीन्दगी है।.

0 comments:

Post a Comment